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नाक के नीचे से भाग गए नीरव,ललित और माल्या

राजेश श्रीवास्तव
इन दिनों देश-दुनिया में एक मोदी चर्चा में पीएम मोदी से भी आगे निकल गया है। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपना दिखाकर कहा था कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा, इसलिए लोगों ने उन्हें भारी बहुमत दिया। लेकिन आज आम आदमी बैंक से डरता है। ललित मोदी, नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग सरकार की नाक के नीचे से भाग गए।

पीएनबी घोटाला करके देश के गरीबों का अरबों रुपये लेकर नीरव मोदी विदेश फरार हो गया है और हमारे राजनीतिक दल पुलिसिया श्ौली में सीमा विवाद की तरह एक-दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। कांग्रेस कह रही है कि भाजपा राज में नीरव मोदी फरार हो गया और भाजपा कह रही है कि घोटाले की नींव तो कांग्रेस के समय ही पड़ गयी थी हमने तो उसे उजागर किया। सवाल यह नहीं कि घोटाला कब हुआ।

सवाल यह है कि आखिर जब मामला उजागर हुआ तो भी आरोपी कैसे देश छोड़ कर भाग गया। इससे पहले भी विजय माल्या, ललित मोदी और अब नीरव मोदी कैसे देश से बाहर चला गया। आखिर कौन सी व्यवस्था दोषी है जिसके चलते इतने बड़े आरोपी देश छोड़कर फरार हो जाते हैं और सरकार सिर्फ उनको वापस लाने का दावा ठोंक रही है। पिछड़े डेढ़ साल से अधिक समय से विजय माल्या को भी देश में वापस नहीं लाया जा सका।

वह भी विदेशों में हमारे पैसे से ऐश कर रहा है और अब विजय माल्या के बाद नीरव मोदी भी अपने भाई समेत दुनिया के दूसरे देश में स्वर्ग का सुख भोग रहा है और हमारे देश की दो राष्ट्रीय पार्टियां एक-दृसरे पर ठीकरा फोड़ रही हैं। आखिर सरकार ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाती कि इन आरोपियों को देश से बाहर भागने से रोका जा सके या फिर इनको वापस लाकर तत्काल वसूली की जाए और इन्हें सलाखों के पीछे भ्ोजा जा सके।

सूत्रों की मानें तो अगर नोटबंदी न हुई होती तो नीरव 2०16 में ही देश छोड़कर भाग जाता। बैंक विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी की वजह से वर्ष 2०17 की शुरुआत में नीरव मोदी की आमदनी घट गई थी, इसलिए वह अपने विदेशी आपूर्तिकर्ता के बिल का भुगतान नहीं कर पाया। ऐसा होने पर उनके आपूर्तिकर्ता ने पीएनबी से जारी लेटर ऑफ अंडरटेकिग को भुना लिया और उनकी पोल खुल गई।

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नीरव मोदी दिसंबर 2०16 में अपने भाई निहाल की शादी के समय देश छोड़ने की योजना बना रहा था। सूत्रों ने बताया कि नीरव मोदी ने कथित तौर पर कई बोगस कंपनियां बनाई। जांच एजेंसियों का मानना है कि नीरव में कई कंपनियों में फर्जी निवेश दिखाया। नीरव ने पहले फंड को भारत से मकाऊ फिर बीजिग, हांगकांग, सिगापुर और कुआलालापुर भेजा। नीरव मोदी को अपने खिलाफ कार्रवाई होने का अंदेशा हो गया था।

सूत्रों ने यह भी बताया कि नीरव अकेले देश नहीं छोड़ना चाहता था इसलिए उसने अपने भाई को बेल्जियम की नागरिकता दिलाई। दोनों भाईयों के देश छोड़ने के बाद जब कोई हो-हल्ला नहीं हुआ तो उसने अपने मामा मेहुल चौकसी को बुला लिया। इसी बीच, उसकी पत्नी मुंबई में बनी रही और जांच एजेंसियों, बैंक और मीडिया की गतिविधियों की जानकारी देती रही. बाद में वह भी बच्चे के साथ देश छोड़कर चली गई।

जानकारी के मुताबिक घोटाले का मुख्य आरोपी नीरव मोदी का पूरा परिवार जनवरी के पहले सप्ताह में ही भारत छोड़ चुका है। मोदी को अंतिम बार स्विटजरलैंड में आयोजित दावोस सम्मेलन में देखा गया था। उनकी पत्नी के पास अमेरिका की नागरिकता है जबकि उनके भाई बेल्जियम की नागरिकता ले चुके हैं। माना जाता है कि मोदी अधिकतर समय अमेरिका में बिताता है।

पहले वह भारत की यात्रा ज्यादा करता था लेकिन पिछले दो वर्षों से उसने भारत आना कम कर दिया था। खबरों के मुताबिक, बैंक फ्रॉड में लिप्त नीरव मोदी एक जनवरी को ही देश छोड़ कर भाग चुका है। अब नीरव वापस लाया जा सकेगा या नहीं, यह सवाल फिलवक्त तो कह पाना बेहद मुश्किल हैं। क्योंकि लाख दावों के बावजूद सरकार अभी तक माल्या को नहीं ला सकी।

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