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जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में बोला था झूठ: सी. श्रीनिवासन

चेन्नै। तमिलनाडु की ई पलनिसामी सरकार के वन मंत्री सी. श्रीनिवासन ने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के अपोलो अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनके स्वास्थ्य के बारे में ‘झूठ’ बोलने पर लोगों से माफी मांगी है। शुक्रवार को मदुरै में आयोजित एक जनसभा के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए सी. श्रीनिवासन ने कहा, ‘हमने यह झूठ बोला था कि उन्होंने (जयललिता) इडली खाई और लोगों से मुलाकात की। सच्चाई यह है कि किसी ने भी उन्हें नहीं देखा था’।

श्रीनिवासन ने कहा कि वह ‘उन झूठों’ के लिए लोगों से माफी मांगते हैं। उनके अनुसार, सरकार में शामिल और सत्तारूढ़ एआईएडीएमके पार्टी के सभी लोगों ने यह झूठ बोला कि वे लोग जयललिता से अपोलो अस्पताल में मिले हैं। जयललिता को पिछले वर्ष 22 सितम्बर की रात खराब स्वास्थ्य की वजह से अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 5 दिसंबर को उनका निधन हो गया था।

‘अस्पताल कक्ष में उनसे किसी ने भी मुलाकात नहीं की’
श्रीनिवासन ने कहा कि एआईएडीएमके के मंत्रियों और यहां तक की राष्ट्रीय नेताओं को भी अपोलो प्रमुख प्रताप रेड्डी के कमरे में बैठना पड़ता था। श्रीनिवासन ने कहा, ‘हमने तब झूठ बोला था ताकि पार्टी के राज को छुपाया जा सके। जयललिता के अस्पताल कक्ष में उनसे किसी ने भी मुलाकात नहीं की थी।’

‘सिर्फ शशिकला को ही थी मिलने की इजाजत’
जयललिता के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान सरकार और अस्पताल की ओर से उनके स्वास्थ्य के बारे में जो बताया गया, वह काफी कम था। उनके स्वास्थ्य के बारे में अधिकतर यही सूचना दी गई थी कि वह अब बेहतर हो रहीं हैं। श्रीनिवासन ने कहा कि कई वर्षों से जयललिता की करीबी सहयोगी रहीं वी. के. शशिकला को ही उनसे मिलने दिया जाता था।

‘1 अक्टूबर के बाद शशिकला के भी मिलने पर लगी रोक’
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शशिकला के भतीजे टी.टी.वी दिनकरन ने बताया कि 1 अक्टूबर 2016 के बाद शशिकला को भी जयललिता से मिलने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के दिशा-निर्देश के बाद केवल दो मिनट के लिए उन्हें जयललिता से मिलने दिया जाता था।

गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलनिसामी ने कुछ दिन पहले ही जयललिता की मौत की जांच रिटायर्ड जज से कराने के सरकार के निर्णय की घोषणा की है।

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